“इस कारण जितनी आज्ञाएँ मैं आज तुम्हें सुनाता हूँ उन सभों को माना करना, इसलिये कि तुम सामर्थी होकर उस देश में जिसके अधिकारी होने के लिये तुम पार जा रहे हो प्रवेश करके उसके अधिकारी हो जाओ,