हे फाटक, तू हाय हाय कर; हे नगर, तू चिल्ला, हे पलिश्तीन, तू सब का सब पिघल जा! क्योंकि उत्तर से एक धूआँ उठेगा और उसकी सेना में से कोई पीछे न रहेगा।”