“शेष लोग अर्थात् याजक, लेवीय, द्वारपाल, गवैये और मन्दिर के सेवक, और जितने परमेश्वर की व्यवस्था मानने के लिये देश देश के लोगों से अलग हुए थे, उन सभों ने अपनी स्त्रियों और उन बेटे–बेटियों समेत जो समझनेवाले थे,