मुझ को उनके पास से आगे बढ़े थोड़ी ही देर हुई थी कि मेरा प्राणप्रिय मुझे मिल गया। मैं ने उसको पकड़ लिया, और उसको जाने न दिया जब तक कि मैं उसे अपनी माता के घर, अर्थात् अपनी जननी की कोठरी में न ले आई।