क्योंकि लिखा है, “हे बाँझ, तू जो नहीं जनती आनन्द कर; तू जिसको पीड़ाएँ नहीं उठतीं, गला खोलकर जय जयकार कर; क्योंकि त्यागी हुई की सन्तान सुहागिन की सन्तान से भी अधिक हैं।”